Thursday, 23 February 2017


कोशिश कर तू हल निकलेगा ,
आज नहीं तो कल निकलेगा 
कोशिश को तू ज़िंदा रख ,
खारे समंदर से भी 
गंगाजल निकलेगा । 

रो कर यूँ फ़रियाद न कर,
व्यर्थ समय बर्बाद न कर ,
कर्मठता की राह पकड़ कर ,
सपनों को आबाद तू कर ।
मेहनत तेरी रंग लाएगी ,
भाग्य तेरा भी बदलेगा ,
कोशिश कर तू हल निकलेगा ,
आज नहीं तो कल निकलेगा

माना काँटों से जीवन भरा हुआ है ,
तपती धूप से जला हुआ है ,
रेगिस्तान की मृग तृष्णा-सा 
एक बवंडर खड़ा हुआ है ।
सोच में पड़ मत ,बढ़ तू आगे 
यह आवरण भी अवश्य हटेगा 
कोशिश कर तू हल निकलेगा ,
आज नहीं तो कल निकलेगा

बन के अर्जुन ,रणभूमि का तू 
कर्मभूमि पे कौशल दिखा,
जीवन के हर पग पर तू ,
अपने हुनर का सबब सिखा 
रख तू यक़ीं अपने जौहर पर,
बंजर ज़मीं से भी फल निकलेगा ,
कोशिश कर तू हल निकलेगा 
आज नहीं तो कल निकलेगा

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