एक और गाँधी
क्रांति की लहर चलती रहे ,
क्रांति से दुनिया बदलती रहे ,
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
न चाह है न तृषा है ,
न मन में कोई ग़ुबार है ,
मुझे कुछ न चाहिए
मेरे पास लोगों का प्यार है ,
अब गूँगे और बहरे लोगों का नहीं है देश ,
बयार आज़ादी की चलती रहे
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
अपने लिए जंग लड़ते हैं सभी ,
ग़ैरों के लिए कुछ करो तो कभी ,
ख़ौफ़नाक सायों से डरना मत कभी ,
अटल इरादों से लड़ना है अभी ,
दिल में ख़्वाहिशें मचलती रहें ,
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
सत्य और अहिंसा का रास्ता बताया था किसी ने ,
अग्निपथ का बिगुल बजाया था किसी ने ,
तख़्तोताज़ को पलट कर हिलाया था किसी ने ,
ऐसी महा -आत्माएँ उतरती रहें
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
विरासत देश की संभालना है तुम्हें ,
बेग़ैरत समझौतों से नहीं बहलना है तुम्हें ,
भ्रष्टाचार की महामारी को भगाना है तुम्हें ,
बस तमन्नाओं की आँधी चलती रहे ,
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
निराशा के बादल भी फट जाएँगे कभी ,
आशाओं के इंद्रधनुष भी निकल आएँगे कभी ,
ज़िंदगी के पल भी हसीन हो जाएँगे कभी ,
बस उम्मीदों की लौ दहकती रहे ,
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
श्यामा
क्रांति की लहर चलती रहे ,
क्रांति से दुनिया बदलती रहे ,
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
न चाह है न तृषा है ,
न मन में कोई ग़ुबार है ,
मुझे कुछ न चाहिए
मेरे पास लोगों का प्यार है ,
अब गूँगे और बहरे लोगों का नहीं है देश ,
बयार आज़ादी की चलती रहे
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
अपने लिए जंग लड़ते हैं सभी ,
ग़ैरों के लिए कुछ करो तो कभी ,
ख़ौफ़नाक सायों से डरना मत कभी ,
अटल इरादों से लड़ना है अभी ,
दिल में ख़्वाहिशें मचलती रहें ,
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
सत्य और अहिंसा का रास्ता बताया था किसी ने ,
अग्निपथ का बिगुल बजाया था किसी ने ,
तख़्तोताज़ को पलट कर हिलाया था किसी ने ,
ऐसी महा -आत्माएँ उतरती रहें
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
विरासत देश की संभालना है तुम्हें ,
बेग़ैरत समझौतों से नहीं बहलना है तुम्हें ,
भ्रष्टाचार की महामारी को भगाना है तुम्हें ,
बस तमन्नाओं की आँधी चलती रहे ,
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
निराशा के बादल भी फट जाएँगे कभी ,
आशाओं के इंद्रधनुष भी निकल आएँगे कभी ,
ज़िंदगी के पल भी हसीन हो जाएँगे कभी ,
बस उम्मीदों की लौ दहकती रहे ,
मैं रहूँ न रहूँ मशाल जलती रहे ।
श्यामा
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