Wednesday, 30 March 2016

कोई तो रास्ता ज़रूर निकलेगा ...........
 

म॑ज़िलें दूर हैं तो क्या हुआ
रास्ते बामुश्किल हैं तो क्या हुआ,
हवाओं के रुख  बदले तो क्या हुआ,
उगता सूरज अन्धेरों को चीरता दिखेगा,
कोई तो रास्ता ज़रूर निकलेगा

मत कोस उस दर्द की अन्धेरभरी रात को,
जिस्म  दिल पर पड़े उस आघात को ,
अक्स उनके ज़हन से तू मिटाने की बातकर ,
 झंझोड़ दिलो -दिमाग कोबस उम्मीदकी बात कर
इस जहां के शोर में भी भाव तेरा निखरेगा ,
कोई तो रास्ता ज़रूर निकलेगा 

प्रतिशोध से  बन पाया  कभी कोईमहान ,
फ़िदा उसी पर हुई ज़िन्दगी , खुदा रहा उसपर मेहरबाँ ,
फ़ना होकर  किया कभी मानवता काप्रतिकार​,
 छेड़े कभी किसी की संवेदनाओं के तार​,
सोच मत इस भंवर से तू अवश्य निकलेगा,
 कोई तो रास्ता ज़रूर निकलेगा 

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