Thursday, 31 March 2016

न कर कोई ग़म ...........

तू उम्मीद भी किए जा , सजदा भी किए जा,
उसके रहम की दुआ भी किए जा,
ठोकरें जितनी भी मिलें -
इरादे कड़े किए जा ।
ग़र सपने सब न हों पूरे , बेशक हों कम
उस पल भी मेरे दोस्त ! न कर कोई ग़म 

जीवन के रास्ते नहीं होते सरल ,
मुश्किलातों से भरे हुए हैं सब पल ,
ज़िंदगी जब सरल कम ,टेढ़ी लगे ज़्यादा ,
करके भी कोई न पूरा करे वादा ,
जब नम हों आँखेंभरा हो मन ,
उस पल भी मेरे दोस्त ! न कर कोई गम । 

जब उजली धूप अपने हिस्से की भी न मिले
चाँदनी कट छट भी न खिले
पूनम का चाँद हो या अमावस की रात ,
ज़िंदगी चलती रहे न रुके कोई बात ,
जब आँसुओं से भी भीगा हो तेरा दामन ,
उस पल भी मेरे दोस्त ! न कर कोई गम ।


श्यामा शर्मा नाग

No comments:

Post a Comment