न कर कोई ग़म ...........
तू उम्मीद भी किए जा , सजदा भी किए जा,
उसके रहम की दुआ भी किए जा,
ठोकरें जितनी भी मिलें -
इरादे कड़े किए जा ।
ग़र सपने सब न हों पूरे , बेशक हों कम
उस पल भी मेरे दोस्त ! न कर कोई ग़म
जीवन के रास्ते नहीं होते सरल ,
मुश्किलातों से भरे हुए हैं सब पल ,
ज़िंदगी जब सरल कम ,टेढ़ी लगे ज़्यादा ,
करके भी कोई न पूरा करे वादा ,
जब नम हों आँखें, भरा हो मन ,
उस पल भी मेरे दोस्त ! न कर कोई गम ।
जब उजली धूप अपने हिस्से की भी न मिले,
चाँदनी कट छट भी न खिले,
पूनम का चाँद हो या अमावस की रात ,
ज़िंदगी चलती रहे न रुके कोई बात ,
जब आँसुओं से भी भीगा हो तेरा दामन ,
उस पल भी मेरे दोस्त ! न कर कोई गम ।
श्यामा शर्मा नाग
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