सोच
अँधेरा गहराया
वारिश की नन्हीं बूँद
सहसा उछली
और बोली
सुनो
हँसोगे खेलोगे
तो दुनिया में हैं रँग
नहीं तो दुख तुम्हारे संग
मैं भी तो टूटी हूँ
अपने संम्पूर्ण से
ठेला है बाधाओं को
तो दिया सहारा ज़मीं ने
तारा टूटता है
तो सौभाग्य हमारा जुड़ता है
फिर क्यों हो तुम हताश
जब ज़िंदगी है तुम्हारे पास
जब हौसले हों बुलंद
और मन में हो विश्वास
तब लक्ष्य तुम्हारे पास
अँधेरा गहराया
वारिश की नन्हीं बूँद
सहसा उछली
और बोली
सुनो
हँसोगे खेलोगे
तो दुनिया में हैं रँग
नहीं तो दुख तुम्हारे संग
मैं भी तो टूटी हूँ
अपने संम्पूर्ण से
ठेला है बाधाओं को
तो दिया सहारा ज़मीं ने
तारा टूटता है
तो सौभाग्य हमारा जुड़ता है
फिर क्यों हो तुम हताश
जब ज़िंदगी है तुम्हारे पास
जब हौसले हों बुलंद
और मन में हो विश्वास
तब लक्ष्य तुम्हारे पास
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